Palitana 5 Chaityavandan In Hindi Full
इच्छामि वंदितुं जिणे, सव्वसिद्धे महाबले।
लोगस्स उज्जोयगरे, दिण्णचक्के वरासणे।।
हिंदी:
मैं सब सिद्धों, महाबलवान्, लोक के प्रकाशक, दिव्य चक्र और उत्तम आसन वाले जिनेंद्र भगवान का वंदन करना चाहता हूँ।
जो साधक पालिताना में 5 चैत्यवंदन को पूर्ण विधि-विधान से करता है, वह निर्जरा (कर्मों का क्षय) तथा मोक्ष का अधिकारी बनता है।
भारत के गुजरात राज्य में स्थित पालिताना (शत्रुंजय तीर्थ) जैन धर्म का सबसे पवित्र तीर्थ स्थल है। मान्यता है कि यहाँ 23वें तीर्थंकर भगवान पार्श्वनाथ और प्रथम तीर्थंकर भगवान ऋषभदेव (आदिनाथ) सहित अनेक तीर्थंकरों ने दीक्षा, क्षमा और मोक्ष प्राप्त किया। पालिताना की यात्रा तब सार्थक होती है, जब यात्री (श्रावक) प्रतिदिन पाँच चैत्यवंदन (5 Chaityavandan) का पाठ करते हुए मंदिरों में वंदना करें। यह लेख संपूर्ण हिंदी भाषा में, शुद्ध मंत्रों एवं भावार्थ सहित प्रस्तुत है। palitana 5 chaityavandan in hindi full
चैत्यवंदन का अर्थ है 'जिनालय (मंदिर) में स्थित जिनेन्द्र देव की वंदना करना'। यह एक विशेष पूजन विधि है, जिसमें अर्हंत (तीर्थंकर) और सिद्ध भगवान की स्तुति की जाती है।
पालीताना में 5 चैत्यवंदन क्यों? पालीताना में करोड़ों मुनियों, चौरासी लाख तपस्वियों तथा अनेकों तीर्थंकरों के क्षेत्र में स्थित प्रत्येक जिनालय की आराधना के लिए यह क्रम बनाया गया है। पाँच चैत्यवंदन पाँच विशेष भावनाओं या पाँच प्रकार के तीर्थंकरों के प्रति समर्पित है।
चूँकि पालिताना में एक ही दिन में 5 या उससे अधिक मंदिर देखे जाते हैं, इसलिए इस विधि का पालन करें: णमो लोए सव्व साहूणं।
पडिक्कमामि दुव्वासणं, पडिक्कमामि सव्व दोस।
पडिक्कमामि पावाणि, पडिक्कमामि सव्वसो।।
हिंदी:
मैं दुर्वासना (बुरी इच्छाओं) का प्रतिक्रमण करता हूँ, सब दोषों का प्रतिक्रमण करता हूँ, पापों का प्रतिक्रमण करता हूँ, और सब प्रकार से प्रतिक्रमण करता हूँ।
यह मंदिर भगवान पार्श्वनाथ (23वें तीर्थंकर) को समर्पित है। इच्छामि वंदितुं जिणे
मूल पाठ:
णमो अरिहंताणं, णमो सिद्धाणं, णमो आयरियाणं, णमो उवज्झायाणं, णमो लोए सव्व साहूणं।
हिंदी अर्थ:
मैं अरिहंत (तीर्थंकर) को नमस्कार करता हूँ, मैं सिद्ध (मुक्त आत्माओं) को नमस्कार करता हूँ, मैं आचार्य को नमस्कार करता हूँ, मैं उपाध्याय को नमस्कार करता हूँ, मैं संसार के समस्त साधुओं को नमस्कार करता हूँ।
विशेषता: यह सभी चैत्यवंदन का आधार है। पालीताना में पहले चैत्यवंदन के रूप में यह 'पंच परमेष्ठि' को समर्पित है।